समय की नाव पे सवार,
मौत की तरफ दौड़ती इस ज़िन्दगी में कुछ नमी सी है..,
कभी ये नमी याद बनकर ओस की तरह जम जाती है ..,
और हवा में घुल जाने से पहले छोड़ जाती है एक गोल निशाँ ....!!!!
कभी दिसम्बर की ठंडक में मुह से निकलती भाप है ये ..
और कभी कड़कती धुप में माथे से फिसलती पसीने की एक बूँद ...!!
कभी घना कोहरा बनके ये निगाह को अपाहिज करती ..
तो कभी काले बदल बनके बारिश की उम्मीद को जिंदा करती ....!!!
ये नाम क्यों है .. गर्म है .. लेकिन बेशर्म है ...
कभी हरी है नीली है पीली भी है ..लेकिन साली गीली है ..
छोटे बच्चे की नाक से बहती हुई ये मासूम है ..,
और कभी किसी की आँखों में जमी हुई पूरी एक कायनात ..!!!
Bathroom से ज़िन्दगी के टपकने की आवाज़ आ रही है शायद ....
इसे रोक देना चाहिए .. कही ये बह न जाये ..
क्युकी समय की नाव पे सवार ..
मौत की तरफ दौड़ती इस ज़िन्दगी में नमी ही तो है ....!!!!!!!!!!!
कभी दिसम्बर की ठंडक में मुह से निकलती भाप है ये ..
और कभी कड़कती धुप में माथे से फिसलती पसीने की एक बूँद ...!!
कभी घना कोहरा बनके ये निगाह को अपाहिज करती ..
तो कभी काले बदल बनके बारिश की उम्मीद को जिंदा करती ....!!!
ये नाम क्यों है .. गर्म है .. लेकिन बेशर्म है ...
कभी हरी है नीली है पीली भी है ..लेकिन साली गीली है ..
छोटे बच्चे की नाक से बहती हुई ये मासूम है ..,
और कभी किसी की आँखों में जमी हुई पूरी एक कायनात ..!!!
Bathroom से ज़िन्दगी के टपकने की आवाज़ आ रही है शायद ....
इसे रोक देना चाहिए .. कही ये बह न जाये ..
क्युकी समय की नाव पे सवार ..
मौत की तरफ दौड़ती इस ज़िन्दगी में नमी ही तो है ....!!!!!!!!!!!
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